Sunday, December 5, 2010

बचपन के दिन

"बचपन"   जिंदगी का सबसे खूबसूरत  समय होता है। मैं जब छोटा था तब सोचता था इक बार जल्दी से बड़ा हो जाऊ फिर तो बस मस्ती ही मस्ती,फिर कोई रोक टोक करने बाला नहीं होगा।जो जी में आएगा करेगे। लेकिन आज सोचता हु काश फिर से वो दिन लोटकर आ जाये। कितने हसीं दिन थे वो,  जीवन में कितनी सच्चाई  थी। जब खुश हुए हँस दीये,जब दर्द हुआ रो दीये। आज जीवन कितना बनाबटी हो गया है  ना खुल के हँस सकता हू  ना  ही खुल के रो सकता हू।

जब कभी घर में कोई कटी  पतंग आ कर गिरती,मम्मी नयी गेंद दिलाती, पढाई करने समय लाइट चली जाती तो मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता।  उन्ही खुशीयों को  और  बड़ा करने के लिए और नयी खुशियाँ की मंजिले पाने के चल पड़े जिन्दगी के सफ़र पर, फिर बस चलते गए चलने गए राह में कई  मुश्किले भी  पड़ी, बड़े साहस से उन्हें पार  किया लेकिन इस दौरान ये ही भूल गए की हम चले क्यों थे। मंजिले निकल गयी पर उनपर ध्यान ही नही गया और हम रास्तो में ही भटकते रहे।

दिया  था जलना, क्योकि अँधेरी थी  रात 
जलाने में दिया, मैं मग्न हुआ इतना
की सुबह के सूरज को ही भूल गया।

निकले थे घर से, खाने को बेर
उलझ गया दामन, काँटों में इतना
की मैं बेर खाना ही भूल गया।

कुछ फूल थे चुनने, सनम के लिए
जुस्तजू में फूलो की, उलझा फिर कुछ ऐसा
की सनम को ही भूल गया।

घर से चले थे हम तो, ख़ुशी की तलाश में!
जब मिली ख़ुशी तो, हम खुश होना भूल गए!!




Thursday, December 2, 2010

मां

मै रोया यहां दूर देस वहां भीग गया तेरा आंचल
तू रात को सोती उठ बैठी हुई तेरे दिल में हलचल
जो इतनी दूर चला आया ये कैसा प्यार तेरा है मां
सब ग़म ऐसे दूर हुए तेरा सर पर हाथ फिरा है मां
जीवन का कैसा खेल है ये मां तुझसे दूर हुआ हूं मै
वक़्त के हाथों की कठपुतली कैसा मजबूर हुआ हूं मै
जब भी मै तन्हा होता हूँ, मां तुझको गले लगाना है
भीड़ बहुत है दुनिया में तेरी बाहों में आना है
जब भी मै ठोकर खाता था मां तूने मुझे उठाया है
थक कर हार नहीं मानूं ये तूने ही समझाया है
मै आज जहां भी पहुंचा हूँ मां तेरे प्यार की शक्ति है
पर पहुंचा मै कितना दूर तू मेरी राहें तकती है
छोती छोटी बातों पर मां मुझको ध्यान तू करती है
चौखट की हर आहट पर मुझको पहचान तू करती है
कैसे बंधन में जकड़ा हूँ दो-चार दिनों आ पाता हूँ
बस देखती रहती है मुझको आँखों में नहीं समाता हूँ
तू चाहती है मुझको रोके मुझे सदा पास रखे अपने
पर भेजती है तू ये कह के जा पूरे कर अपने सपने
अपने सपने भूल के मां तू मेरे सपने जीती है
होठों से मुस्काती है दूरी के आंसू पीती है
बस एक बार तू कह दे मां मै पास तेरे रुक जाऊंगा
गोद में तेरी सर होगा मै वापस कभी ना जाऊंगा