Friday, June 14, 2013

अहसास

बेखुदी में था कट रहा सफ़र 
खुद , खुदी से था बेखबर । 

मंजिल की चमक ना आँखों में थी 
ना उसके ना होने की कसक आहो में थी । 

न दिशाओ का ज्ञान था 
पतझड़ के टूटे -पात सा, मैं गुमनाम था । 

मौसम तो बहारो का था 
गुल चमन और सितारों का था । 

पर मैं इक जड़वत पत्थर सा 
खड़ा किनारे पर था । 

तभी इक मंद आहट सी हुई । 
दिल में इक चाहत सी हुई । 

उनके आने का अंदाज निराला सा था । 
बाल रेशम से , और बदन मधुशाला सा था । 

हम उन्हें इकटक देख रहे थे 
दिल को भटकने से रोक रहे थे ।

तभी हमें मंजिल न होने पर , गुमां सा हुआ 
राहो में भटकने में , ख़ुशी का शमां सा हुआ 

महक से उनकी मैं मदहोश हुआ 
निज जडवत अस्तित्व, रूप सागर में आगोश हुआ । 

उस दिन अहसास हुआ ।। 
उस दिन अहसास हुआ ।। 

ख़ुशी ना किसी को पाने या खोने साहस है । 
ख़ुशी का ना मंजिल, ना राहो , ना आशियाने में आवास है ।

चाहे मंजिल हो बेगानी , चाहे रहे हो अनजानी 
ख़ुशी तो साथ हमसफ़र के, होने का अहसास है । 

इसीलिए आज हम, साथ उनकी यादों के हो गये । 
माँझी सा स्थिर , पर सवार लहरों पर हो गये ॥ 







**This poem is flash of inspiration from someone :)

Tuesday, June 11, 2013

' चाहत ' सागर की बूंद की

चाहत  है  मुझको 
बादल  तुझको  पाने  की । 











देखकर  तप सूरज का 
उससा तपी बन  जाने की ।  
चाहत है कुछ  कर जाने की 
पावन जीवन को पाने की । 

कड़वे-खारेपन से दूर 
मीठा नीर बन जाने की । 
मधु में अस्तित्व  पाकर 
फूलो में मुस्काने की । 

चाहत  है  मुझको 
बादल  तुझको  पाने  की । 

साथी से गरमी लेकर 
दिल में आग धधकाने  की । 
मलिन विचारो को तजकर 
हवा से हल्का हो जाने की । 

अपनी ही आशाओं से बढकर 
बादल में आशियां पाने की । 
फिर बैठ हवा के कंधो पर 
जगत भ्रमण कर आने की । 

चाहत  है  मुझको 
बादल  तुझको  पाने  की । 

प्यासा जग-जन-जीवन देखकर 
आशा बन  छा जाने की । 
ममता माँ-धरा की पाकर 
नमी दिल में भर आ जाने की । 

आशा मनु-संतानों  की पाकर 
ऊपर , और ऊपर उठ जाने की । 
व्याकुल राधा की देख विरह 
फिर पानी में बदल जाने की । 

चाहत  है  मुझको 
बादल  तुझको  पाने  की । 

कर्मठता मानव की देखकर 
झुक आने की , झुक आने की । 
नव-नूतन पुष्पों पर छाकर 
प्रियेतम का आलिंगन पाने की । 

श्वेत हिमालय में गिरकर
ऊँचा चरित्र उठाने की । 
आशीर्वाद धरा का पाकर 
हिम सा धवल बन जाने की । 

चाहत  है  मुझको 
बादल  तुझको  पाने  की ।