चाहत है मुझको
बादल तुझको पाने की ।
देखकर तप सूरज का
उससा तपी बन जाने की ।
चाहत है कुछ कर जाने की
पावन जीवन को पाने की ।
कड़वे-खारेपन से दूर
मीठा नीर बन जाने की ।
मधु में अस्तित्व पाकर
फूलो में मुस्काने की ।
चाहत है मुझको
बादल तुझको पाने की ।
बादल तुझको पाने की ।
देखकर तप सूरज का
उससा तपी बन जाने की ।
चाहत है कुछ कर जाने की
पावन जीवन को पाने की ।
कड़वे-खारेपन से दूर
मीठा नीर बन जाने की ।
मधु में अस्तित्व पाकर
फूलो में मुस्काने की ।
चाहत है मुझको
बादल तुझको पाने की ।
साथी से गरमी लेकर
दिल में आग धधकाने की ।
मलिन विचारो को तजकर
हवा से हल्का हो जाने की ।
अपनी ही आशाओं से बढकर
बादल में आशियां पाने की ।
फिर बैठ हवा के कंधो पर
जगत भ्रमण कर आने की ।
चाहत है मुझको
बादल तुझको पाने की ।
बादल तुझको पाने की ।
प्यासा जग-जन-जीवन देखकर
आशा बन छा जाने की ।
ममता माँ-धरा की पाकर
नमी दिल में भर आ जाने की ।
आशा मनु-संतानों की पाकर
ऊपर , और ऊपर उठ जाने की ।
व्याकुल राधा की देख विरह
फिर पानी में बदल जाने की ।
चाहत है मुझको
बादल तुझको पाने की ।
बादल तुझको पाने की ।
कर्मठता मानव की देखकर
झुक आने की , झुक आने की ।
नव-नूतन पुष्पों पर छाकर
प्रियेतम का आलिंगन पाने की ।
श्वेत हिमालय में गिरकर
ऊँचा चरित्र उठाने की ।
आशीर्वाद धरा का पाकर
हिम सा धवल बन जाने की ।
चाहत है मुझको
बादल तुझको पाने की ।
बादल तुझको पाने की ।

2 comments:
bahut achchi chahta hai..mujh me bhi jag gayi hai
Thank you Sir :)
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